Tuesday, May 24

धर्म-कर्म

अयोध्या की रामलीला में माँ सीता का रोल निभा रही है जानी – मानी एक्टर दीक्षा रैना
Culture, उत्तर प्रदेश, धर्म-कर्म

अयोध्या की रामलीला में माँ सीता का रोल निभा रही है जानी – मानी एक्टर दीक्षा रैना

उत्तर प्रदेश: अयोध्या की रामलीला संस्थापक कमेटी के जनरल सेक्रेटरी क्रिएटिव डायरेक्टर एंड डिज़ाइनर शुभम मलिक ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया की माता सीता का रोल इस बार जानीमानी हस्ती दीक्षा रैना निभाएगी उन्होंने स्टेज प्ले में लगभग 300 नाटक किये है और दीक्षा रैना महाभारत में भूमिका निभा रही है है और कई फिल्मों में भी काम किया है जैसे माय स्पेस और माई भी इन्फ्लुएंसर जैसे कई फिल्मो में भूमिका निभाई है । शुभम मलिक ने बोला दीक्षा रैना माता सीता का रोल 6 दिन का है पर वह अयोध्या में 12 दिन पहले आ जाएगी और रिहर्सल दीक्षा रैना ने माता सीता की रोल शुरू कर दी है बॉम्बे में। और राम की भूमिका राहुल भूचर जी कर रहे है। जिसकी घोषणा हम पहले ही कर चुके है। माननीय सांसद रवि किशन जी राम भक्त केवट की भूमिका निभा रहे है , और सांसद मनोज तिवारी जी परशुराम की भूमिका , और विंदु दारा सिंह हनुमान जी की भूमिक...
हवन के समय स्वहा का उच्चारण क्यों करते हैं…
धर्म-कर्म

हवन के समय स्वहा का उच्चारण क्यों करते हैं…

हवन के समय स्वहा का उच्चारण क्यों करते हैं... हिन्दू धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य बिना हवन के पूर्ण नहीं होता है। कहा जाता है कि हवन के माध्यम से मनुष्य अपनी आवाज़ देवताओं तक पहुंचा सकता हैं। शास्त्रों के अनुसार हवन करने से घर में सकारात्मक उर्जा का प्रभाव होता है। कई जगह तो हवन को गृह शुद्धिकरण का सबसे अच्छा तरीका भी माना गया है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि हवन के समय आहुति देते वक्त हम स्वाहा क्यूँ कहते है? हम आपको बताएँगे कि किस पौराणिक कथा के अनुसार स्वाहा शब्द का उच्चारण हवन में आहुति के वक्त क्यों किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार हवन सामग्री को देवताओ तक पहुचाने के लिए स्वाहा शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। पर अब सवाल ये उठता है की आखिर कैसे स्वाहा कहने से हवन सामग्री देवताओं के पास पहुँच पाती है। शास्त्रों में अग्नि को सबसे पवित्र माना गया है। अतः हवन सामग्री को देवताओ तक पहुच...
आज है बुद्ध पूर्णिमा, जाने शुभ मूहर्त और व्रत का विधान
धर्म-कर्म

आज है बुद्ध पूर्णिमा, जाने शुभ मूहर्त और व्रत का विधान

आज है बुद्ध पूर्णिमा, जाने शुभ मूहर्त और व्रत का विधान आज वैशाख माह की पूर्णिमा है। जिसे बुद्ध पुर्णिमा के नाम से भी जाना है। क्योकि इसी दिन भगवान बुद्ध धरती पर अवतरित हुए थे। बुद्ध को भगवान विष्णु के नवें अवतार के रूप में जाना जाता है। बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था। इसलिए आज के दिन को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है। इस साल आज यानि 16 मई 2022 को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है। पूर्णिमा के दिन व्रत का विधान है। व्रत के साथ-साथ दान पुण्य, गंगा स्नान का बहुत अधिक महत्व है। शुभ मुहूर्त 15 मई दिन रविवार को 12:45 से 16 मई दिन सोमवार को 9:43 तक रहेगा। आपको बता दें कि पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। भगवान सत्यनारायण के नाम से इनको पूजा जाता है और सत्यनारायण नाम का ही व्रत और जाप किया जाता है। अंत में रात को चंद...
एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां स्वयं भगवान सूर्य महालक्ष्मी के चरणों में नवाते हैं शीष
देश, धर्म-कर्म

एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां स्वयं भगवान सूर्य महालक्ष्मी के चरणों में नवाते हैं शीष

एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां स्वयं भगवान सूर्य महालक्ष्मी के चरणों में नवाते हैं शीष... क्या आप जानते हैं कि हमौरे देश में एक ऐसे मंदिर भी है, जहां साक्षात भगवान सूर्य माता लक्ष्मी जी के चरणों में प्रणाम करते हैं। यह एक ऐसा मंदिर है जहां देवी लक्ष्मी पूरब या उत्तर दिशा की ओर नहीं बल्कि पश्चिम दिशा की ओर देखती मिलेंगी। यह महालक्ष्मी मंदिर शक्ति पीठों में से एक है, जिसका उल्लेख पुराणों में मिलता है। जी हां आज हम आपको बताने वाले हैं महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर की। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां भक्तों के द्वारा मांगी गई मन्नत जरुर पूरी होती है। मान्यता है की यहां श्री महालक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ निवास करती हैं। इस मंदिर का निर्माण 700 ईसवीं में कन्नड़ के चालुक्य साम्राज्य के समय में किया गया था। मंदिर में काले पत्थर...
कैसे करें अपने दिन की शुरुवात बेहतर…
धर्म-कर्म

कैसे करें अपने दिन की शुरुवात बेहतर…

हर कोई यह चाहता है कि उसके दिन की शुरुआत बेहद शानदार हो और उसका दिन अच्‍छा बीते व उसने दिन के लिए जो योजना अपने दिमाग में बना रखी है, वह पूरी हो। शास्‍त्रों में दिन की शुरुआत के कुछ खास तरीकों के बारे में बताया गया है। इनमें से एक है प्रात: वंदन। सुबह उठकर बिस्‍तर छोड़ने से पहले यदि हम कुछ मंत्रों का जप करें तो हमारा दिन भी सफल होता है और मां लक्ष्‍मी भी हम पर मेहरबान होती हैं। पहला मंत्र गीता में बताया गया है कि मनुष्‍य को सबसे पहले सुबह बिस्‍तर छोड़ने से भी पहले अपने हाथों के दर्शन करने चाहिए। साथ ही इस मंत्र का जप करना चाहिए। कराग्रे वसति लक्ष्मीः, कर मध्ये सरस्वती। करमूले तू ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्। इस मंत्र का अर्थ है कि हथेलियों के आगे के भाग में मां लक्ष्‍मी, मध्‍य भाग में मां सरस्‍वती और मूल में भगवान परमब्रह्म का निवास है। हे प्रभु सुबह के समय मैं इनके दर्शन ...
ब्रहस्पति को समर्पित है गुरुवार का दिन, जाने क्या हैं कथा और कैसे करें पूजा…
धर्म-कर्म

ब्रहस्पति को समर्पित है गुरुवार का दिन, जाने क्या हैं कथा और कैसे करें पूजा…

ब्रहस्पति को समर्पित है गुरुवार का दिन, जाने क्या हैं कथा और कैसे करें पूजा... शास्त्रों के अनुसार गुरुवार को ब्रहस्पति देव की पूजा करने का विधान है। बृहस्पति की उपासना ज्ञान, सौभाग्य व सुख देने वाली मानी गई है। दरअसल ब्रहस्पति की उपासना करने से ज्ञान व विद्या के रास्ते तन, मन व भौतिक दुखों से मुक्त जीवन जी सकते हैं। हिन्दू धर्म शास्त्रों के विशेष कामनाओं की पूर्ति हेतु खास दिनों पर की जाने वाली गुरु पूजा में गुरुवार को देवगुरु ब्रहस्पति की पूजा का भी महत्व बताया गया है। व्रत विधि 1. सुबह जल्दी उठकर स्नान कर ले। 2. बृहस्पतिदेव की पूजा करते समय उनका ध्यान करें। 3. इसके बाद पीले फल, पीले फूल, पीले वस्त्रों से भगवान बृहस्पतिदेव को चढाये। 4. गंध, अक्षत, पीले फूल, चमेली के फूलों से पूजा करें। पीली वस्तुओं जैसे चने की दाल से बने पकवान, चने, गुड़, हल्दी या पीले फलों का भोग लगाएं। 5. गु...
मोहिनी एकादशी पर शुभ हर्षण योग और ग्रहों का विशेष संयोग 4 राशि वालों के लिए बना रहा ‘राजयोग’
धर्म-कर्म

मोहिनी एकादशी पर शुभ हर्षण योग और ग्रहों का विशेष संयोग 4 राशि वालों के लिए बना रहा ‘राजयोग’

मोहिनी एकादशी पर शुभ हर्षण योग और ग्रहों का विशेष संयोग 4 राशि वालों के लिए बना रहा 'राजयोग' Mohini Ekadashi 2022: मान्यता है ये वही दिन है जब भगवान विष्णु ने धरती को असुरों से बचाने के लिए अप्सरा मोहिनी का रूप धारण किया था। इसलिए इस दिन उपवास करने से भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। मोहिनी एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रत में बेहद ही श्रेष्ठ माना गया है। ये एकादशी हर साल वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। ये तिथि इस बार 12 मई को पड़ रही है। मान्यता है ये वही दिन है जब भगवान विष्णु ने धरती को असुरों से बचाने के लिए अप्सरा मोहिनी का रूप धारण किया था। इसलिए इस दिन उपवास करने से भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस बार की मोहिनी एकादशी पर कई शुभ योग बन रहे हैं। जो इस दिन में चार चांद लगा रहे हैं। मोहिनी एकादशी पर खास संयोग -इस दिन गुरुवार पड...
Awadh TV की  प्रस्तुति अद्भुत श्लोकों की कहानी…
धर्म-कर्म

Awadh TV की प्रस्तुति अद्भुत श्लोकों की कहानी…

Awadh TV की प्रस्तुति अद्भुत श्लोकों की कहानी... आज हम आप लोगो के लिए एक ऐसा विषय लेकर आए है जिसके बारे में शायद ही आप लोगो ने कभी सुना होगा। जी हां आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे ग्रंथ की जिसके श्लोको को चाहे आप सीधा पड़े या उल्टा दोनो ही तरह से उसका अर्थ बनता है । इसके साथ ही उसके श्लोकों में समाय हैं रामायण और श्रीमद्भागवत। हम आज आपको जानकारी देंगे राघवयादवीयम की, यह एक ग्रंथ है। जिसमें समाया है भगवान राम और कृष्ण की जीवनी। क्या ऐसा संभव हो सकता है कि जब आप किसी पुस्तक को सीधा पढ़े तो रामायण की कथा पढ़ी जाए और उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण भागवत की कथा सुनाई दे। जी हां, कांचीपुरम के 17वीं शदी के कवि वेंकटाध्वरि रचित ग्रन्थ “राघवयादवीयम्” ऐसा ही एक अद्भुत ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ को ‘अनुलोम-विलोम काव्य’ के नाम से भी जाना जाता है। इस पूरे ग्रन्थ में केवल 30 श्लोक ही हैं। इन श्लोकों को सीधे-...
बदरीनाथ धाम के कपाट खुले,घर बैठे कीजिए दर्शन
देश, धर्म-कर्म, बड़ी खबर

बदरीनाथ धाम के कपाट खुले,घर बैठे कीजिए दर्शन

बदरीनाथ धाम के कपाट खुले,घर बैठे कीजिए दर्शन देखिए वीडियो : भू-वैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह 6ः15 बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले दिए गए। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और दर्शन लाभ लिया। मंदिर प्रबंधन ने पहले से इसके लिए तैयारी कर ली थी। 15 क्विंटल फूलों से मंदिर की भव्य सजावट की गई। कपाट खुलने पर अखंड ज्योति के दर्शनों को देश-विदेश से सात हजार से अधिक यात्री बदरीनाथ धाम पहुंच चुके थे। इससे पहले भगवान बदरी विशाल का खजाना उनके वाहन गरुड़जी के साथ शुक्रवार को ही बदरीनाथ पहुंच गया था। बदरीनाथ धाम के साथ ही सुबह 6ः15 बजे सुभांई गांव स्थित भविष्य बदरी धाम के कपाट भी खोले दिए गए। उधर, केदारपुरी के रक्षक बाबा भुकुंट भैरव मंदिर के कपाट खुलने के साथ शनिवार से केदारनाथ धाम में नित्य पूजाएं व शाम की आरती शुरू हो गई। धाम में लगभग 20 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। htt...
Benefits of Tulsi:तुलसी की सूखी पत्तियां चमकाएंगी आपका भाग्य, उन उपायों से मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न
धर्म-कर्म, स्वास्थ

Benefits of Tulsi:तुलसी की सूखी पत्तियां चमकाएंगी आपका भाग्य, उन उपायों से मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न

Benefits of Tulsi:तुलसी की सूखी पत्तियां चमकाएंगी आपका भाग्य, उन उपायों से मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न Tulsi Remedies: तुलसी के पौधे को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना गया है। तुलसी के बिना भगवान श्रीविष्णु की पूजा पूरी नहीं होती है। मान्यता है कि इसमें मां लक्ष्मी का वास होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुलसी के पौधे में जल देने और उसके सामने दीपक जलाने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं तुलसी की सूखी पत्तियों का भी बहुत महत्व है। इसके कुछ ज्योतिष उपाय करने से धन-दौलत की बरसात होती है। वह जातकों को देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। https://twitter.com/speedy_pandit/status/1522876503352037377 तुलसी की सूखी पत्तियों के उपाय 1. धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण को तुलसी की सूखी पत्तियां प्रिय हैं। तुलसी की एक पत्ती का इस्तेमाल 15 दिनों तक भगवान कान्हा के भोग में किया जा...