Tuesday, May 24

एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां स्वयं भगवान सूर्य महालक्ष्मी के चरणों में नवाते हैं शीष

एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां स्वयं भगवान सूर्य महालक्ष्मी के चरणों में नवाते हैं शीष... क्या आप जानते हैं कि हमौरे देश में एक ऐसे मंदिर भी है
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एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां स्वयं भगवान सूर्य महालक्ष्मी के चरणों में नवाते हैं शीष…

क्या आप जानते हैं कि हमौरे देश में एक ऐसे मंदिर भी है, जहां साक्षात भगवान सूर्य माता लक्ष्मी जी के चरणों में प्रणाम करते हैं। यह एक ऐसा मंदिर है जहां देवी लक्ष्मी पूरब या उत्तर दिशा की ओर नहीं बल्कि पश्चिम दिशा की ओर देखती मिलेंगी। यह महालक्ष्मी मंदिर शक्ति पीठों में से एक है, जिसका उल्लेख पुराणों में मिलता है। जी हां आज हम आपको बताने वाले हैं महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर की।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां भक्तों के द्वारा मांगी गई मन्नत जरुर पूरी होती है। मान्यता है की यहां श्री महालक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ निवास करती हैं। इस मंदिर का निर्माण 700 ईसवीं में कन्नड़ के चालुक्य साम्राज्य के समय में किया गया था। मंदिर में काले पत्थर का एक मंच हैं जिस पर महालक्ष्मी जी की चार हाथों वाली काले पत्थर से बनी प्रतिमा विद्यमान है। देवी चारों हाथों में अमूल्य वस्तुएं धारण किये हुए हैं। उनके सिर पर गहनों से सजा मुकुट है, जिसका वजन चालीस किलोग्राम है और इस मुकुट में भगवान विष्णु के शेषनाग और नागिन का चित्र बना हुआ है साथ ही मंदिर की दीवार पर श्री यंत्र को पत्थर पर खोद कर बनाया गया है। मंदिर में महालक्ष्मी के अलावा नवग्रहों, दुर्गा माता, सूर्य नारायण, भगवान शिव, भगवान विष्णु, विट्ठल रखमाई, तुलजा भवानी आदि देवी देवताओं की मूर्तियां भी स्थित हैं। मंदिर परिसर में स्थित मणिकर्णिका कुंड के तट पर विश्वेश्वर महादेव मंदिर की भी काफी प्रसिद्धि है।

इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां महालक्ष्मी जी के चरणों में खुद सूर्य देवता प्रणाम करते हैं। दरअसल यहां पश्चिमी दीवार पर एक खिड़की बनी हुई है जिसके चलते मार्च और सितंबर में 21 तारीख के आसपास तीन दिनों तक सूर्य की किरणें देवी को रोशनी से सराबोर करते हुए उनके चरणों को प्रणाम करती हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माहालक्ष्मी तिरुपति यानी भगवान विष्णु से रूठकर कोल्हापुर आ गईं। इस वजह से दीपावली के दिन आज भी तिरुपति देवस्थान से आया शालू उन्हें पहनाया जाता है। यह भी कहा जाता है कि किसी की भी तिरुपति यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक वह यहां आकर महालक्ष्मी का पूजा अर्चन ना कर ले। यहां महालक्ष्मी को करवीर निवासी अंबाबाई के नाम से भी पुकारा जाता है। कहा जाता है कि दीपावली की रात को होने वाली महाआरती में श्रद्धालु यहां जो भी मुरादे मांगते हैं वह जरूर पूरी होती हैं।
आपको बता दें कि हाल ही में यह मंदिर तब चर्चा का केंद्र बाना जब यहां अकूत खजाने के बारे में पता लगा। 900 साल पुराने इस मंदिर में सोने के बेशुमार गहने निकले जिनकी कीमत का आकलन दो सप्ताह तक चला। इसके बाद सारे खजाने का बीमा कराया गया। बता दें की इस बेशकीमती मंदिर की सुरक्षा बेहद कड़ी रहती है और पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहता है। माना जाता है कि मंदिर में जो अकूत खजाना मिला है उसे चढ़ाने वालों में कोंकण के राजाओं, चालुक्य राजाओं, आदिल शाह, शिवाजी और उनकी मां जीजाबाई शामिल हैं।

आपको बता दें की इस मंदिर में पहले सिर्फ पुरुषों को ही जाने की अनुमती थी, लेकिन काफी संघर्ष के बाद आखिरकार इसमें महिलाओं को भी जाने की इजाजत मिली। पहले तो मंदिर के पुजारी इसके विरोध में थे, लेकिन महिलाओं के बढ़ते विरोध और राज्य सरकार के दखल के बाद महिलाओं ने गर्भगृह में प्रवेश कर महालक्ष्मी की पूजा कर महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का रास्ता साफ कर दिया।

एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां स्वयं भगवान सूर्य महालक्ष्मी के चरणों में नवाते हैं शीष…

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